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Showing posts from May, 2018

दोहा

देखौ तुमनै रोप दई है.....एक भितरिया रार, आगें आगें तुम चले,अब जिल्लेओ मेरौ वार... उर्मिला माधव... 5.5.२०१४...

दुनियां हमारी

न तौ घर ई हमारौ न दुनियां हमारी, पतौ जे चलौ कै हमईं ए भिकारी, इमारत तौ अब लौं धरी जों की तों ऐं, कै सांसई अचानक चली गई बिचारी, हबाके भरे जिन्ने दुनियां में ऊंचे, बेऊ मर कैं कित्ते ...