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ब्रज की दुनियां छल करवे वारेन की दुनियां औंधी ऐ, जग भर की आँखिन में खास रतौंधी ऐ। कितनों जुलम सहौ धरती की माटी नें, आसमान में बिजुरी जब जब कौंधी ऐ।। ता ऊपर फिर घटा बरस कें रोअन लगी, पर धरती की खुशबू कितनी सौंधी ऐ।। उर्मिला माधव