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झल्लू पल्लू

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छल करवे वारेन की दुनिया

ब्रज की दुनियां छल करवे वारेन की दुनियां औंधी ऐ, जग भर की आँखिन में खास रतौंधी ऐ। कितनों जुलम सहौ धरती की माटी नें, आसमान में बिजुरी जब जब कौंधी ऐ।। ता ऊपर फिर घटा बरस कें रोअन लगी, पर धरती की खुशबू कितनी सौंधी ऐ।। उर्मिला माधव

कै दिन बचे हैं

ब्रज की दुनियां देखियो अब और कित्ते दिन बचे हैं, मेरे संग संग और कै साकिन बचे हैं? झूठ कौ झगड़ौ जबर ते का मिटैगौ, इक सपेरा, नाग और नागिन बचे हैं.. चैन की का सांस अब आवैगी हमकूँ? जब अबई जे दुख्ख तौ अनगिन बचे हैं.. को मुकद्दर कौ लिखौ अब मैट देगौ? जिंदगी में जेई दो पल छिन बचे हैं उर्मिला माधव साकिन---अचल

न घर ही हमारो

न घर ही हमारौ न दुनियां हमारी, पतौ जे चलौ कै हमईं ए भिकारी, इमारत तौ अब लौं धरी जों की तों ऐं, कै सांसई अचानक चली गई बिचारी, हबाके भरे जिन्ने दुनियां में ऊंचे, बेऊ मर कैं कित्ते भये भारी-भारी, जि निश्चित है सब कूँ ई मरनौ पडैगौ, कभू जाकी बारी,कभू बाकी बारी, जो कहनी ई हमकूं,सो कह दीनी हमनै तौ मानौ न मानौ है राजी तुम्हारी, सबै छोड़ जानौ है दुनियां कौ मेला, डरी यईं रहेंगी महलिया अटारी... उर्मिला माधव.... 11.5.2016...
जब चाहें तब मर जामेंगे, इतनों तौ हम कर जामेंगे, याद करंगे दुनिया वारे, जी में खूब उतर जामेंगे, पत्थर जबई बजर जामेंगे,

नैक टिके रऔ भइया

नैक टिके रऔ भैया अभाल आय रई हूँ, अपने घर के कामन ऐ निबटाय रई हूँ, अबई तौ सबरे काम डरे ऐं, जों के तों, दार भई है बा में छोंक लगाय रई हूँ, उर्मिला माधव.. 30.4.2016

न्यारी तेरी चौखट है

एक मतला तीन शेर... ब्रज की दुनियां सब दुनियां ते न्यारी तेरी चौखट है, बंसी बारे,दुनियां तेरी बदौलत है, मोर पंख ते सजौ भयौ दरबार बहौत, दरबज्जे पै खूब बज रही नौबत है, ढोल नगाड़े खूब बजत हैं आँगन में, मर्द कृष्ण हैं,राधा इक-इक औरत है, जब ते पैदा भये तब ई ते संग लगी, विरह वेदना बृज बासिन की दौलत है... #उर्मिलामाधव..