नैक टिके रऔ भैया अभाल आय रई हूँ, अपने घर के कामन ऐ निबटाय रई हूँ, अबई तौ सबरे काम डरे ऐं, जों के तों, दार भई है बा में छोंक लगाय रई हूँ, उर्मिला माधव.. 30.4.2016
एक मतला तीन शेर... ब्रज की दुनियां सब दुनियां ते न्यारी तेरी चौखट है, बंसी बारे,दुनियां तेरी बदौलत है, मोर पंख ते सजौ भयौ दरबार बहौत, दरबज्जे पै खूब बज रही नौबत है, ढोल नगाड़े खूब बजत हैं आँगन में, मर्द कृष्ण हैं,राधा इक-इक औरत है, जब ते पैदा भये तब ई ते संग लगी, विरह वेदना बृज बासिन की दौलत है... #उर्मिलामाधव..
ब्रज की दुनियां अब बिहारी तोई तक आनों परैगौ, बाबरेन की नाईं चिल्लानों परैगौ, भीतरई भीतर हमें चों लग रही है, तो ते लड़िकें खूब रुरिहानों परैगौ, सब जरे जा रए हैं, तोकूँ दीख ना रौ, अब भला तोकूं भी समझानों परैगौ? आंख केऊ डॉक्टर होमें हैं छलिया, तोकूँ चस्मा टैस्ट करवानों परैगौ, हमसौ ऊ कोउ ढीट तोकूँ नांय मिलनों, अब कें तोकूँ हमते बतरानों परैगौ उर्मिला माधव