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Showing posts from May, 2026

झल्लू पल्लू

चलौ समैटो, झल्लू-पल्लू, तीस मार खां हैगौ लल्लू, अबई छुटपुटॉ थोरौ बाक़ी, है जावैगौ हल्लू-हल्लू, अपने मोंह ते गावत डोलें सबई कहें फिर कल्लू-कल्लू, बैय्यर ठी-ठी कर कें हंस रईं, मोंह पै धर साड़ी कौ पल्लू, अपईं इज्जत हाथ में अपने, इतै-बितै चों फिरें निठल्लू, उर्मिला माधव 23.5.2018

छल करवे वारेन की दुनिया

ब्रज की दुनियां छल करवे वारेन की दुनियां औंधी ऐ, जग भर की आँखिन में खास रतौंधी ऐ। कितनों जुलम सहौ धरती की माटी नें, आसमान में बिजुरी जब जब कौंधी ऐ।। ता ऊपर फिर घटा बरस कें रोअन लगी, पर धरती की खुशबू कितनी सौंधी ऐ।। उर्मिला माधव

कै दिन बचे हैं

ब्रज की दुनियां देखियो अब और कित्ते दिन बचे हैं, मेरे संग संग और कै साकिन बचे हैं? झूठ कौ झगड़ौ जबर ते का मिटैगौ, इक सपेरा, नाग और नागिन बचे हैं.. चैन की का सांस अब आवैगी हमकूँ? जब अबई जे दुख्ख तौ अनगिन बचे हैं.. को मुकद्दर कौ लिखौ अब मैट देगौ? जिंदगी में जेई दो पल छिन बचे हैं उर्मिला माधव साकिन---अचल

न घर ही हमारो

न घर ही हमारौ न दुनियां हमारी, पतौ जे चलौ कै हमईं ए भिकारी, इमारत तौ अब लौं धरी जों की तों ऐं, कै सांसई अचानक चली गई बिचारी, हबाके भरे जिन्ने दुनियां में ऊंचे, बेऊ मर कैं कित्ते भये भारी-भारी, जि निश्चित है सब कूँ ई मरनौ पडैगौ, कभू जाकी बारी,कभू बाकी बारी, जो कहनी ई हमकूं,सो कह दीनी हमनै तौ मानौ न मानौ है राजी तुम्हारी, सबै छोड़ जानौ है दुनियां कौ मेला, डरी यईं रहेंगी महलिया अटारी... उर्मिला माधव.... 11.5.2016...
जब चाहें तब मर जामेंगे, इतनों तौ हम कर जामेंगे, याद करंगे दुनिया वारे, जी में खूब उतर जामेंगे, पत्थर जबई बजर जामेंगे,