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Showing posts from March, 2026

चाह बची ना

हमकूँ नैकऊ चाह बची ना, तुम जे सोचौ, राह बची ना गम होतौ तौ, मर रए होते, बस हमकूँ परवाह बची ना, जैसी चाही तैसी कहि लई, काऊ बात की आह बची ना, हमें फिकिर कब लगी है जाकी, लोगन पै कोउ वाह बची ना, सबकी दुनिया देखी हमनें, राम राम अल्लाह बची ना, काउ नें कहि दई, बात राख दई, पर भीतर कोउ चाह बची ना.. #उर्मिलामाधव @highlight  #followers

मन कौ मैल

आज बिरज में,होरी रे रसिया... मन कौ मैल धुबौ नईं नैकउ,रंग लगाय केँ का होगौ, प्यार न मन में छार बराबर,बात बनाय कें का होगौ, भीतर-भीतर गारी दै रये,संग नाच रये होरी में, कपट, ईर्ष्या,मिटौ न नैकउ,फाग सुनाय केँ का होगौ, चगन-मगन सब अपने काजें,औरन कूँ भये उपदेशक, प्रीत की रीत खुदऊ तौ सीखौ, गाल बजाय केँ का होगौ, माई-बाप कूँ पूछत नानें,भूखे ऎं कै प्यासे ऎं छप्पन भोग धरौ इक लंग कूं, थार सजाय केँ का होगौ, सुनौ कन्हैया,बृज सूनौ है,कहि देओ, फिर कब आऔगे? तबतक अपनी धरौ टपरिया, बिरज बसाय केँ का होगौ... उर्मिला माधव 12.3.2017

मची है देखौ रार ई बेशुमार

ब्रज की दुनियां मची है देखौ रार ई बे शुम्मार, गुंडा और ख़ूनिन ते अब तौ भरी दीख रई मंडी ऐ, भीतर भीतर आग लगी और झूठ कहें सब ठंडी ऐ, इतै-बितै चमचा सब डोलें डाल गले में अंडी ऐ, धोती कुर्ता पहन कें नाचें ता ऊपर इक बंडी ऐ, इतनौ त्रास मिलौ लोगन कूँ, हैगये सब बेजार, मची है देखौ..... लरिका बारे डरप रए सब आगें का का हौनी ऐ, सबरौ जीवन डरौ भयौ ऐ, कती सूत में पौनी ऐ, नीमन, बेजा समझ न आवै कैसी आँख मिचौनी ऐ, कोऊ न बतरामें आपस में जैसें दुनियां मौनी ऐ, भोले भाले मांसन पै ऊ है रये अत्याचार, मची ऐ देखौ रार ई बे शुम्मार, होरी ऐ वृषभान लली कोहराम मचौ ऐ धड़कन पै ललिता और बिसाखा डोलें, मारी-मारी सड़कन पै, नेंक नेंक है जाय करेजा अब बिजुरी की कड़कन पै, रात रात भर नींद न आवै चौबारे की खड़कन पै, जानें आंखें कहा देखलें, मैया अबकी बार, उर्मिला माधव

दामिनी दमक कें चमक मारै बावरी

दामिनी दमकि केँ चमक मारै बावरी, भीतर ह्रदय के ....कुरेदै सब घाव री, अँखियाँ बहावें नीर,मनुआँ धरे न धीर, नित्य प्रति थोड़ो सो घटे बस चाव री... उर्मिला माधव, 9.3.2017

मची है देखौ रार

मची है देखौ रार ई बे शुम्मार, गुंडा और ख़ूनिन ते अब तौ भरी दीख रई मंडी ऐ, भीतर भीतर आग लगी और झूठ कहें सब ठंडी ऐ, इतै-बितै चमचा सब डोलें डाल गले में अंडी ऐ, धोती कुर्ता पहन कें नाचें ता ऊपर इक बंडी ऐ, इतनौ त्रास मिलौ लोगन कूँ, हैगये सब बेजार, मची है देखौ.....