मची है देखौ रार ई बे शुम्मार,
गुंडा और ख़ूनिन ते अब तौ भरी दीख रई मंडी ऐ,
भीतर भीतर आग लगी और झूठ कहें सब ठंडी ऐ,
इतै-बितै चमचा सब डोलें डाल गले में अंडी ऐ,
धोती कुर्ता पहन कें नाचें ता ऊपर इक बंडी ऐ,
इतनौ त्रास मिलौ लोगन कूँ,
हैगये सब बेजार,
मची है देखौ.....
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