एक मतला तीन शेर... ब्रज की दुनियां
सब दुनियां ते न्यारी तेरी चौखट है,
बंसी बारे,दुनियां तेरी बदौलत है,
मोर पंख ते सजौ भयौ दरबार बहौत,
दरबज्जे पै खूब बज रही नौबत है,
ढोल नगाड़े खूब बजत हैं आँगन में,
मर्द कृष्ण हैं,राधा इक-इक औरत है,
जब ते पैदा भये तब ई ते संग लगी,
विरह वेदना बृज बासिन की दौलत है...
#उर्मिलामाधव..
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