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Showing posts from November, 2018

सुन बौपारी

सुन बौपारी, बात हमारी, तेरी मत बिल्कुल गई मारी, जा नारी नें जीवन दैकें, सिंहासन की लाज सम्हारी इतनी हिम्मत कर लई तैनें, छत्राणी की आब उतारी ? बुद्धिमता से पति छुड़वायौ, गोरा तक प...

जबर की चली है

निबल कौ कहाँ कोऊ दुनियां में साथी, लगैगी कै जैसें जबर की चली है, मगर तू हमारी ऊ सुन लीजो लाला, हकीकत में आखिर सबर की फली है उर्मिला माधव 16.11.2017