नैक टिके रऔ भैया अभाल आय रई हूँ, अपने घर के कामन ऐ निबटाय रई हूँ, अबई तौ सबरे काम डरे ऐं, जों के तों, दार भई है बा में छोंक लगाय रई हूँ, उर्मिला माधव.. 30.4.2016
मैं तुमें समसान तक लै जाउंगी, सच तुमें आँखिन ते मैं दिखवाउंगी, ऐसी सच्चाई लिखी है राख पै, खुद ई पढियोँ मैं कहा पढ़वाउंगी, श्याम मुख हों या कि हों कर्पूर मुख, जे ई सबकौ अंत है समझा...
कहीं मेघ मल्हार सा राग बजे,कहीं वायु चले हलकी-हलकी, हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,कहां बात कहूँ सखि उस पल की, मन पावन प्रेम के रंग रंगा,और तान बजे मुरली की कहीं, हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,और आँख पड़े छलकी-छलकी, उर्मिला माधव.... 14.4.2015..