Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2019

अभाल आय रई हूँ

नैक टिके रऔ भैया अभाल आय रई हूँ, अपने घर के कामन ऐ निबटाय रई हूँ, अबई तौ सबरे काम डरे ऐं, जों के तों, दार भई है बा में छोंक लगाय रई हूँ, उर्मिला माधव.. 30.4.2016

समसान तक लै जाऊंगी

मैं तुमें समसान तक लै जाउंगी, सच तुमें आँखिन ते मैं दिखवाउंगी, ऐसी सच्चाई लिखी है राख पै, खुद ई पढियोँ मैं कहा पढ़वाउंगी, श्याम मुख हों या कि हों कर्पूर मुख, जे ई सबकौ अंत है समझा...

हलकी हल्की

कहीं मेघ मल्हार सा राग बजे,कहीं वायु चले हलकी-हलकी, हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,कहां बात कहूँ सखि उस पल की, मन पावन प्रेम के रंग रंगा,और तान बजे मुरली की कहीं, हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,और आँख पड़े छलकी-छलकी, उर्मिला माधव.... 14.4.2015..