चलौ समैटो, झल्लू-पल्लू, तीस मार खां हैगौ लल्लू, अबई छुटपुटॉ थोरौ बाक़ी, है जावैगौ हल्लू-हल्लू, अपने मोंह ते गावत डोलें सबई कहें फिर कल्लू-कल्लू, बैय्यर ठी-ठी कर कें हंस रईं, मोंह पै धर साड़ी कौ पल्लू, अपईं इज्जत हाथ में अपने, इतै-बितै चों फिरें निठल्लू, उर्मिला माधव 23.5.2018