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Showing posts from July, 2020

बन पावैगी

देख लला जब जीउ बिगर गौ बात नहीं बन पावैगी, बात तबउ हम कहिंगे अपनी जब जैसी मन आवैगी, हमनें तुम ते कहाँ कही, हम ऊंची-ऊंची हांकिंगे, झूठौ नाम लगायौ तौ फिर हम-तुम में ठन जावैगी, रूठ गई जब राधा मैया , बे मतलब के स्वांगन ते इतनी मत उम्मीद राखियों,सेंत मेंत मन जावैगी, जीउ ऊजरौ लैकें भैया, जब जी करै डिगरि अइयों, ता ऊपर ईमान लि अइयों, तब गहरी छन जावैगी... उर्मिला माधव 9.7.2020