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Showing posts from November, 2021

जमानों देख कें

ब्रज की दुनियां जी डरप रौ है जमानों देख कें, ज़िन्दगी कौ तानों बानों देख कें, सावधानी ना बची नीयत में अब, चोर है गए सब खजानों देख कें, जे अहम की बात ना है साँच है, आंख भर गई घर पुरानों देख कें, मान्स कूं पहचाननों आसान कब, पाँय धरियो अपनों खानों देख कें, गैल टेढ़ी ऐ अटकियो मत कहूं, होस में चल हर मुहानों देख कें, उर्मिला माधव 20.11.2919