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Showing posts from January, 2024

बिचारौ मन

जीवन भर कूँ रूठ गयौ है मेरौ भोरौ-भारौ मन, दुनिया कौ जब देख लियौ है बिल्कुल कारौ-कारौ मन, कभू-कभू जे जी में आवै नाम उजग्गर कर देते, लेकिन लड़नों जानें ना है करतौ कहा बिचारौ मन,