कब तक इतनों भाजैगौ? आखिर तौ रुक जावैगौ. आपा धापी मती करै, तौ फिर बुध्धू बाजैगौ।। स्याउ-स्याउ मोंह देखे की, कोउ न मान बढ़ावैगौ.. बारी फुलवारी कूँ देख, काम गैर नईं आवैगौ.. आंख मिली तौ वा जी वा, पीठ फिरी डकरावैगौ.. डरपा-डरपी, बे-मतलब, लाज समरिया राखैगौ.. उर्मिला माधव