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Showing posts from March, 2025

मुस्कील ते

ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी, कितनी गहराई पूछें साहिल ते, हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की, दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते, उर्मिला माधव 28.3.2018

जर जावैगौ

जा में का का जर जावैगौ होरी के जर जावे ते, बोझ कहां हलकौ है जागौ एकई के मर जावे ते, आंख निकारें ठड़ी है दुनिया मौका मिले तौ कतल करें ऐसें कैसें चल पावैगी बे मतलब कूं डर जावे ते,