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Showing posts from November, 2019

तानों बानों देख कें

ब्रज की दुनियां जी डरप रौ है जमानों देख कें, ज़िन्दगी कौ तानों बानों देख कें, सावधानी ना बची नीयत में अब, चोर है गए सब खजानों देख कें, जे अहम की बात नानें साँच है, आंख भर गई घर पुरानों देख कें, मान्स कूं पहचाननों आसान कब, पाँय धरियो अपनों खानों देख कें, गैल टेढ़ी ऐ अटकियो मत कहूं, होस में चल हर मुहानों देख कें, उर्मिला माधव 20.11.2919

फ्री वर्स

हम चेहरा नहीं, एक मुखौटा हैं, बचपन खोते हुए, जवानी की दहलीज़ बदलते हुए मानदंड यानि एक बेटी, ज़िन्दगी, एक सौदा, क्या लेंगे आप? बेटी के इलावा ? धन ? या हमारा सारा सुकून संकोच न करें, केवल कहें, हम चैन खोने पर, सहमत हैं, धन देकर भी, बस---- एक बार आपका द्वार, कन्या का घरबार, ध्यान रहे, गैस सिलेंडर न फटे, क्योंकि अब नया युग, स्टोव का समय नहीं, उर्मिला माधव

बात हमारी

सुन बौपारी, बात हमारी, तेरी मत बिल्कुल गई मारी, जा नारी नें जीवन दैकें, सिंहासन की लाज सम्हारी इतनी हिम्मत कर लई तैनें, छत्राणी की आब उतारी ? बुद्धिमता से पति छुड़वायौ, गोरा तक पहुंची सन्नारी, पदमावति सम्मान राष्ट्र कौ, जाते इज़्ज़त बंधी हमारी, भूल गयौ तू,जौहर करकें, सूनी कर दईं महल अटारी, उर्मिला माधव 19.11.2017

जबर की चली है

निबल कौ कहाँ कोऊ दुनियां में साथी, लगैगी कै जैसें जबर की चली है, मगर तू हमारी ऊ सुन लीजो लाला, हकीकत में आखिर सबर की फली है उर्मिला माधव 16.11.2017