ब्रज की दुनियां जी डरप रौ है जमानों देख कें, ज़िन्दगी कौ तानों बानों देख कें, सावधानी ना बची नीयत में अब, चोर है गए सब खजानों देख कें, जे अहम की बात नानें साँच है, आंख भर गई घर पुरानों देख कें, मान्स कूं पहचाननों आसान कब, पाँय धरियो अपनों खानों देख कें, गैल टेढ़ी ऐ अटकियो मत कहूं, होस में चल हर मुहानों देख कें, उर्मिला माधव 20.11.2919