सुन बौपारी, बात हमारी,
तेरी मत बिल्कुल गई मारी,
जा नारी नें जीवन दैकें,
सिंहासन की लाज सम्हारी
इतनी हिम्मत कर लई तैनें,
छत्राणी की आब उतारी ?
बुद्धिमता से पति छुड़वायौ,
गोरा तक पहुंची सन्नारी,
पदमावति सम्मान राष्ट्र कौ,
जाते इज़्ज़त बंधी हमारी,
भूल गयौ तू,जौहर करकें,
सूनी कर दईं महल अटारी,
उर्मिला माधव
19.11.2017
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