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Showing posts from December, 2019

संग को देतौ

अकेले आए दुनियां में, हमारौ संग को देतौ, हमारी भींजी चूँनर कूं, हवा कौ रंग को देतौ, हमारी आत्मा में राग अब तक डूबते डोलें, तौ टूटी रागिनी कूं यों बताऔ चंग को देतौ, विधाता नें बनायौ है,हमें बस रंज सहिबे कूं, करेजा के तड़पबे कूं, बताऔ जंग को देतौ कै जिननै ज़िन्दगी भर मांसन के खून चूसे हों, तौ ऐसे राक्षसन कूं तब छमा कौ ढंग को देतौ मगर हां जाई दुनियां में न होते भोरे ब्रज वासी  तौ फिर किसना की नगरी कूं भला हुड़दंग को देतौ, उर्मिला माधव 25.12.2017

लईयों बस

राजनीति कौ किस्सा भैया गजलन में मत लईयों बस, जितनौ हमकूं हजम है सकै उतनौ ही बतलईयों बस, रोटी पानी भूल गए सब,गईयन की है फिकिर लगी, डरप रहे हैं सब घर बारे,नौहरे तक मत अईयों बस, जाति वाद के ढोंगन में तौ,मेरौ नांय समर्थन जी, धरम-करम के नाम,जिनावर,कोऊ बलि मत चढ़ईयों बस, खेती करौ मजूरी कल्लेओ,या फिर करौ नौकरी कऊं, खून पसीना की ही खईयों,चोरी की मत खईयों बस, निरी तरह के आकर्षण हैं,दुनियां में जंजाल बौहौत, अपनौ आप सम्हारै रखियों,कहूँ भटक मत जईयों बस, दुनियां की का होड़ करौगे,दुनियां तौ फिर दुनियां है, शिष्टाचार निभईयों अपनौ ,औरन पै मत जईयों बस... #उर्मिलामाधव... 2.12.2015