मची है देखौ रार ई बे शुम्मार, गुंडा और ख़ूनिन ते अब तौ भरी दीख रई मंडी ऐ, भीतर भीतर आग लगी और झूठ कहें सब ठंडी ऐ, इतै-बितै चमचा सब डोलें डाल गले में अंडी ऐ, धोती कुर्ता पहन कें नाचें ता ऊपर इक बंडी ऐ, इतनौ त्रास मिलौ लोगन कूँ, हैगये सब बेजार, मची है देखौ..... लरिका बारे डरप रए सब आगें का का हौनी ऐ, सबरौ जीवन डरौ भयौ ऐ, कती सूत में पौनी ऐ, नीमन, बेजा समझ न आवै कैसी आँख मिचौनी ऐ, कोऊ न बतरामें आपस में जैसें दुनियां मौनी ऐ, भोले भाले मांसन पै ऊ है रये अत्याचार, मची ऐ देखौ रार ई बे शुम्मार, होरी ऐ वृषभान लली कोहराम मचौ ऐ धड़कन पै ललिता और बिसाखा डोलें, मारी-मारी सड़कन पै, नेंक नेंक है जाय करेजा अब बिजुरी की कड़कन पै, रात रात भर नींद न आवै चौबारे की खड़कन पै, जानें आंखें कहा देखलें, मैया अबकी बार, उर्मिला माधव