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रार ई बे शुम्मार

मची है देखौ रार ई बे शुम्मार,
गुंडा और ख़ूनिन ते अब तौ भरी दीख रई मंडी ऐ,
भीतर भीतर आग लगी और झूठ कहें सब ठंडी ऐ,
इतै-बितै चमचा सब डोलें डाल गले में अंडी ऐ,
धोती कुर्ता पहन कें नाचें ता ऊपर इक बंडी ऐ,
इतनौ त्रास मिलौ लोगन कूँ,
हैगये सब बेजार,
मची है देखौ.....
लरिका बारे डरप रए सब आगें का का हौनी ऐ,
सबरौ जीवन डरौ भयौ ऐ, कती सूत में पौनी ऐ,
नीमन, बेजा समझ न आवै कैसी आँख मिचौनी ऐ,
कोऊ न बतरामें आपस में जैसें दुनियां मौनी ऐ,
भोले भाले मांसन पै ऊ है रये अत्याचार,
मची ऐ देखौ रार ई बे शुम्मार,

होरी ऐ वृषभान लली कोहराम मचौ ऐ धड़कन पै
ललिता और बिसाखा डोलें, मारी-मारी सड़कन पै,
नेंक नेंक है जाय करेजा अब बिजुरी की कड़कन पै,
रात रात भर नींद न आवै चौबारे की खड़कन पै,
जानें आंखें कहा देखलें, मैया अबकी बार,
उर्मिला माधव

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मुस्कील ते

ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी, कितनी गहराई पूछें साहिल ते, हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की, दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते, उर्मिला माधव 28.3.2018

अपनों आप बनानौं होगौ

ब्रज की दुनियां अपनों आप बनानों होगौ, बा के बाद जमानों होगौ.. मार पीट ते, चों डरपौगे, आगें हाथ बढ़ानों होगौ। चलनों हो जो संग सबई के झूठौ लाड़ लड़ानों होगौ। इक ढर्रा पै नांय चलैगी, नक्सा नयौ बनानों होगौ.. नाम उजागर करवे काजें, गहरौ रंग लगानों होगौ। खूब बना लै महल अटरिया, सांस रुकी तौ जानों होगौ। जग में जितने स्वांग रचे हैं, सबकौ मोल चुकानों होगौ।। उर्मिला माधव

प्रीत की रीत निभावै

थोरे दिन कौ जीवन है तौ मन कूँ मत भरमावै, रह जागी यईं धरम संकला,सांस जबई रुक जावै, माई बाप और पुत्र पौत्र कूँ,कितनौउ लाड़ लड़ावै आँख मुंदी सोई भये बटाऊ,फिर कोउ लौट न पावै नित-नित रार करै दुनियां में,ज़र,जोरू की खातिर, बढ़िया हो जो हर काऊ ते,प्रीत की रीत निभावै, उर्मिला माधव.. 24.10.2016