एक मतला दो शेर--- हम हेया की हेरि कें ऊ का करिंगे, जित्ते दिन जीबौ लिखौ है,ना मरिंगे, चों बुरौ हम काऊ कौ चीतें बताऔ, जा ते बढ़िया नौहरे में जा डरिंगे, सबके करमन कौ यईं लेखा धरौ है, बात जे ऐ सब अपओं हिस्सा भारिंगे, #उर्मिलामाधव... 28.9.2015
नैक न सोची कान्हा, बच्चा बिलखंगे?? प्रभू सबन के मात-पितन कूं लै लंगे ? तुम कूं को पूछैगौ ऐसे जुल्मन पै, जब दुनियां में लरिका वारे उठ लंगे.. याद तुमऊं कूं नानी अपनी आवैगी, जब सबके व्यौहार तुमईं ते बदलेंगे.. बूढ़े, बालक कोऊ न छोड़ौ दुनियां में? हम तौ अपनी आप तसल्ली कर लंगे.. बड़ौ करेजा पत्थर कौ कर राखौ ऐ, बिन दुनियां के प्रान तुम्हारेउ भटकंगे.. उर्मिला माधव