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नैक न सोची कान्हा

नैक न सोची कान्हा, बच्चा बिलखंगे??
प्रभू सबन के मात-पितन कूं लै लंगे ?

तुम कूं को पूछैगौ ऐसे जुल्मन पै,
जब दुनियां में लरिका वारे उठ लंगे..

याद तुमऊं कूं नानी अपनी आवैगी,
जब सबके व्यौहार तुमईं ते बदलेंगे..

बूढ़े, बालक कोऊ न छोड़ौ दुनियां में?
हम तौ अपनी आप तसल्ली कर लंगे..

बड़ौ करेजा पत्थर कौ कर राखौ ऐ,
बिन दुनियां के प्रान तुम्हारेउ भटकंगे..
उर्मिला माधव

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