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Showing posts from November, 2022

जी डरप रौ है

ब्रज की दुनियां जी डरप रौ है जमानों देख कें, ज़िन्दगी कौ तानों बानों देख कें, सावधानी ना बची नीयत में अब, चोर है गए सब खजानों देख कें, जे अहम की बात ना है साँच है, आंख भर गई घर पुरानों देख कें, मान्स कूं पहचाननों आसान कब, पाँय धरियो अपनों खानों देख कें, गैल टेढ़ी ऐ अटकियो मत कहूं, होस में चल हर मुहानों देख कें, उर्मिला माधव 20.11.2919

बन पावेगी

ब्रज की दुनियां देख लला जब जीउ बिगर गौ बात नहीं बन पावैगी, हम तौ अपनी तबउ कहिंगे जब जैसी मन आवैगी, हमनें तुम ते कहाँ कही, हम ऊंची-ऊंची हांकिंगे, झूठौ नाम लगायौ तौ फिर हम-तुम में ठन जावैगी, रूठ गई जब राधा मैया , बे मतलब के स्वांगन ते इतनी मत उम्मीद राखियों,सेंत मेंत मन जावैगी, जीउ ऊजरौ लैकें भैया, जब जी करै डिगरि अइयों, ता ऊपर ईमान लि अइयों, तब गहरी छन जावैगी... उर्मिला माधव 9.7.2020