ब्रज की दुनियां
देख लला जब जीउ बिगर गौ बात नहीं बन पावैगी,
हम तौ अपनी तबउ कहिंगे जब जैसी मन आवैगी,
हमनें तुम ते कहाँ कही, हम ऊंची-ऊंची हांकिंगे,
झूठौ नाम लगायौ तौ फिर हम-तुम में ठन जावैगी,
रूठ गई जब राधा मैया , बे मतलब के स्वांगन ते
इतनी मत उम्मीद राखियों,सेंत मेंत मन जावैगी,
जीउ ऊजरौ लैकें भैया, जब जी करै डिगरि अइयों,
ता ऊपर ईमान लि अइयों, तब गहरी छन जावैगी...
उर्मिला माधव
9.7.2020
Comments
Post a Comment