आज बिरज में,होरी रे रसिया... मन कौ मैल धुबौ नईं नैकउ,रंग लगाय केँ का होगौ, प्यार न मन में छार बराबर,बात बनाय कें का होगौ, भीतर-भीतर गारी दै रये,संग नाच रये होरी में, कपट, ईर्ष्या,मिटौ न नैकउ,फाग सुनाय केँ का होगौ, चगन-मगन सब अपने काजें,औरन कूँ भये उपदेशक, प्रीत की रीत खुदऊ तौ सीखौ, गाल बजाय केँ का होगौ, माई-बाप कूँ पूछत नानें,भूखे ऎं कै प्यासे ऎं छप्पन भोग धरौ इक लंग कूं, थार सजाय केँ का होगौ, सुनौ कन्हैया,बृज सूनौ है,कहि देओ, फिर कब आऔगे? तबतक अपनी धरौ टपरिया, बिरज बसाय केँ का होगौ... उर्मिला माधव 12.3.2017