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Showing posts from March, 2024

पंडित जी की छोरी है

ब्रज की दुनियां खून ते दुनियां रंगी भई और तुम्हें सूझ रई होरी है, रंग बीत गए जाने कब के औंधी धरी कमोरी है, याद करें सब दहनाबर जो हमने देखीं बचपन में, और बड़ेन के हाथ मूड़ पै, पंडित जी की छोरी है, उर्मिला माधव

रंग लगाकेँ का होगौ

आज बिरज में,होरी रे रसिया... मन कौ मैल धुबौ नईं नैकउ,रंग लगाय केँ का होगौ, प्यार न मन में छार बराबर,बात बनाय कें का होगौ, भीतर-भीतर गारी दै रये,संग नाच रये होरी में, कपट, ईर्ष्या,मिटौ न नैकउ,फाग सुनाय केँ का होगौ, चगन-मगन सब अपने काजें,औरन कूँ भये उपदेशक, प्रीत की रीत खुदऊ तौ सीखौ, गाल बजाय केँ का होगौ, माई-बाप कूँ पूछत नानें,भूखे ऎं कै प्यासे ऎं छप्पन भोग धरौ इक लंग कूं, थार सजाय केँ का होगौ, सुनौ कन्हैया,बृज सूनौ है,कहि देओ, फिर कब आऔगे? तबतक अपनी धरौ टपरिया, बिरज बसाय केँ का होगौ... उर्मिला माधव 12.3.2017

बतामें हैं

ब्रज की दुनियां रंग रूप तौ यों है कै भगवान बनामें ऎं रुपन बारे बेमतलब की सान दिखामें ऐं. सबके अपने पाँय सबन की गैल अलग बेमतलब के ज्ञानी सबकूँ गैल बतामें ऐं उर्मिला माधव