Skip to main content

रंग लगाकेँ का होगौ

आज बिरज में,होरी रे रसिया...

मन कौ मैल धुबौ नईं नैकउ,रंग लगाय केँ का होगौ,
प्यार न मन में छार बराबर,बात बनाय कें का होगौ,

भीतर-भीतर गारी दै रये,संग नाच रये होरी में,
कपट, ईर्ष्या,मिटौ न नैकउ,फाग सुनाय केँ का होगौ,

चगन-मगन सब अपने काजें,औरन कूँ भये उपदेशक,
प्रीत की रीत खुदऊ तौ सीखौ, गाल बजाय केँ का होगौ,

माई-बाप कूँ पूछत नानें,भूखे ऎं कै प्यासे ऎं
छप्पन भोग धरौ इक लंग कूं, थार सजाय केँ का होगौ,

सुनौ कन्हैया,बृज सूनौ है,कहि देओ, फिर कब आऔगे?
तबतक अपनी धरौ टपरिया, बिरज बसाय केँ का होगौ...
उर्मिला माधव
12.3.2017

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कील ते

ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी, कितनी गहराई पूछें साहिल ते, हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की, दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते, उर्मिला माधव 28.3.2018

बबा जू

हकीकत बबा जू,समझनी परैगी, मजा की सजा तौ,भुगतनी परैगी, न बैय्यर की इज्जत है मिसरी कौ ढेला, जि गोली कुनैनी,गटकनी परैगी, घड़ी तुमनें बांधी है,सोने की मन भर, तौ लोहेउ की तुमकूँ पहरनी ...

कैसें आंकौ जायगौ

प्रेम कौ अनुपात आखिर कैसैं आंकौ जायगौ, यों बताऔ, मन के भीतर कैसैं झाँकौ जायगौ, पीर कौ अनुमान अब तक कौन कर पायौ कहौ, एक ही लठिया ते कैसे प्रेम हाँकौ जायगौ, आँख के आँसुंन ऐ तौ तुम हाथ ते ढकि लेओगे, घाव की दुनियां कौ हिस्सा कैसैं ढाँकौ जायगौ, जिंदगी भर राख चूल्हे की लगी रई हाथ में जे बताऔ और कब तक रेत फांकौ जायगौ, झालरी,झूमर सजा केँ, देह सुन्दर कर लई, कौन खन जे भाग मोतिन संग टांकौ जायगौ ? उर्मिला माधव.... 4.4.2016