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Showing posts from May, 2024

साकिन बचे हैं

ब्रज की दुनियां देखियो अब और कित्ते दिन बचे हैं, मेरे संग संग और कै साकिन बचे हैं? झूठ कौ झगड़ौ जबर ते का मिटैगौ, इक सपेरा, नाग और नागिन बचे हैं.. चैन की का सांस अब आवैगी हमकूँ? जब अबई जे दुख्ख तौ अनगिन बचे हैं.. को मुकद्दर कौ लिखौ अब मैट देगौ? जिंदगी में जेई दो पल छिन बचे हैं उर्मिला माधव साकिन---अचल

मोबाईल

ब्रज भाषा रीलन वारे जानें का का कर रए हैं, छोटे छोटे बालक जामें पर रए हैं, छोटे मोंह पर बातें कितनी बड़ी-बड़ी, मैया बाप न जानें कितकूँ मर रए हैं जानें कैसी ब्याधा आय कें ठड़ी भई, मोबाईल कूँ लैकें लोग बिखर रए हैं, बच्चन कौ रखवारौ आखिर को होगौ? समझदार अब सोच सोच कें डर रए हैं, उर्मिला माधव