ब्रज की दुनियां एक सवेरौ सौ रातन पै भारी है, राम दुलारे, गैया कौनें मारी है? भैंसा, बकरा, और मुरगन की बात अलग, इनके मरिबे की तौ महिमा न्यारी है, राम लला रे अब दुनियां कौ का होगौ? योंई समझ रये बिगरी बात सम्हारी है चिमटा की आवाज पै गैया आय गई, घर आई तब गैया रोज बिड़ारी है रोज बहाने चैयें बिनकूँ लडिबे कूँ, अब कें लरिकन नें तलवार निकारी है.. मैं बलिहारी अपनेइ बंसी वारे की, तीनों लोक ते अबऊ मथुरा न्यारी है. उर्मिला माधव