रात भर के मेह नै,तौ काम सब बिगारे ऐं, सड़कन के खांचेन नै,कितने लोग मारे ऐं, नैकऊ बिसात नाँय मांस्सन के जीवन की, देखौ कैसे मौसम ने ...पांय अब उखारे ऐं... उर्मिला माधव.. 16.7.2016
जब तक है जी कूँ आस न घबराएं और चलें, कितने भी इकल्ले हों कोऊ नाएँ और चलें, जीवन कौ का है आज हतै और कल नहीं, जो राजी ऐं जा बात पे, तौ आएं और चलें, भई ज़िन्दगी तौ गैल है मिलने हैं ,नए लोग, त...
ब्रज ग़ज़ल सब राम ने बनाए अनुपात में,बराबर, औक़ात में बराबर,और जात में बराबर, हर लंग है अँधेरौ,बिल्कुल ही एक जैसौ, और रौशनी कौ जलवा परभात में बराबर जो बैर कर रए हैं,अपनों चलन है बिन...