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Showing posts from July, 2018

एक शेर..

भागते रहनौ उमर भर मांस कौ प्रारब्ध है, का नतीजा होयगौ,जे सोच कें स्तब्ध है,

इतरायौ भयौ है

कौनसी बातन पै इतरायौ भयौ ऐ, बाबरौ इनसान भरमायौ भयौ ऐ, हांऊं-फाऊं कर रह्यौ ऐ चार लंग कूँ, झूठ की दुनियां पै बौरायौ भयौ ऐ होस में आजा,मरै मत लोभ ते रे, जोरिवे कौ भूत चों छायौ भयौ है, ...

गामन की छोरी

इतनी चों इतरामे गामन की छोरी, ता ऊपर अपने कूं समझें ऐं भोरी, जैसें कै गोपिन नें घेरौ कन्हैया ऑ, बोलीं पकरि कें,चों कर रौ ऐ चोरी, तोकूँ सिखामेंगे बढ़िया ते,चल तू, बड़ी भारी गल्ती ऐ,स...

मुक्तक

रात भर के मेह नै,तौ काम सब बिगारे ऐं, सड़कन के खांचेन नै,कितने लोग मारे ऐं, नैकऊ बिसात नाँय मांस्सन के जीवन की, देखौ कैसे मौसम ने ...पांय अब उखारे ऐं... उर्मिला माधव.. 16.7.2016

और चलें

जब तक है जी कूँ आस न घबराएं और चलें, कितने भी इकल्ले हों कोऊ नाएँ और चलें, जीवन कौ का है आज हतै और कल नहीं, जो राजी ऐं जा बात पे, तौ आएं और चलें, भई ज़िन्दगी तौ गैल है मिलने हैं ,नए लोग, त...

राम नें बनाए

ब्रज ग़ज़ल सब राम ने बनाए अनुपात में,बराबर, औक़ात में बराबर,और जात में बराबर, हर लंग है अँधेरौ,बिल्कुल ही एक जैसौ, और रौशनी कौ जलवा परभात में बराबर जो बैर कर रए हैं,अपनों चलन है बिन...