इतनी चों इतरामे गामन की छोरी,
ता ऊपर अपने कूं समझें ऐं भोरी,
जैसें कै गोपिन नें घेरौ कन्हैया ऑ,
बोलीं पकरि कें,चों कर रौ ऐ चोरी,
तोकूँ सिखामेंगे बढ़िया ते,चल तू,
बड़ी भारी गल्ती ऐ,समझै है थोरी,
अकड़ देखौ जाकी मरौ जा रयौ ऐ,
ऐसी अकड़ तुमने देखी कऊं ओरी?
चलौ माफ़ी माँगौ ऑ घर जाऔ अपने,
भली ना लगत जे अकड़ कोरी-कोरी..
उर्मिला माधव,
19.7.2017
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