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Showing posts from March, 2019

मुश्किल ते

ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, ...

आवत है

बृजभाषा में एक पेशकश.... मइया मोकूँ रोज-रोज समझावत है, लौट फेर केँ बाई की सुधि आवत है, सबते छुपकें चढ़ केँ गई अटरिया पै, सइ संजा ते मन मेरौ घबरावत है, सब दुनियां के पीयु घरई में हैं आ...

चाव री

दामिनी दमकि केँ चमक मारै बावरी, भीतर ह्रदय के ....कुरेदै सब घाव री, अँखियाँ बहावें नीर,मनुआँ धरे न धीर, नित्य प्रति थोड़ो सो घटे बस चाव री... उर्मिला माधव, 9.3.2017

भगवान

रंग रूप तौ यों है कै भगवान बनावें ऎं रुपन बारे बेमतलब की शान दिखावें ऐं