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Showing posts from February, 2026

कब तक इतनौ भाजैगौ

ब्रज की दुनिया कब तक इतनों भाजैगौ? आखिर तौ रुक जावैगौ. आपा धापी मती करै, तौ फिर बुध्धू बाजैगौ।। स्याउ-स्याउ मोंह देखे की, कोउ न मान बढ़ावैगौ.. बारी फुलवारी कूँ देख, काम गैर नईं आवैगौ.. आंख मिली तौ वा जी वा, पीठ फिरी डकरावैगौ.. डरपा-डरपी, बे-मतलब, लाज समरिया राखैगौ.. उर्मिला माधव

होड़ मची सिंहासन की

ब्रज के रंग दुनियां में जब होड़ मची सिंहासन की, हमकूँ फिकिर लगी है चौका बासन की, जब जी चाहे, बैठौ, मन में राम भजौ चाहत का करनी है कुस के आसन की. सब ते पहलें उठ कें घर के काम करौ, याद सम्हारौ मन में विघ्न बिनासन की, जब जोरन ते हवा चली ढह जानों सब, दुनियां खालिस महल बनी है तासन की.. याद करौ बिन देस के बीर जवानन की, युद्ध करौ और रोटी खाई घासन की.. उर्मिला माधव