ब्रज के रंग
दुनियां में जब होड़ मची सिंहासन की,
हमकूँ फिकिर लगी है चौका बासन की,
जब जी चाहे, बैठौ, मन में राम भजौ
चाहत का करनी है कुस के आसन की.
सब ते पहलें उठ कें घर के काम करौ,
याद सम्हारौ मन में विघ्न बिनासन की,
जब जोरन ते हवा चली ढह जानों सब,
दुनियां खालिस महल बनी है तासन की..
याद करौ बिन देस के बीर जवानन की,
युद्ध करौ और रोटी खाई घासन की..
उर्मिला माधव
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