Skip to main content

सम्हारै कोई


जमानों कितनों बिगरि गयौ ऐ, कै ख़ुद कूँ कितनों सम्हारै कोई,
अजब-अजब से हैं माँस जग में,करेजा कितनों पजारै कोई,
जिन्हें पजरिबे कौ शौक है बे,बिना ही मतलब पजर रये हैं,
लिखौ ऐ जिनके करम में जरिबौ तौ बिनकूं कितनों बिडारै कोई,
जे जिंदगानी है जामें भैया,हजार घटना लिखी भई ऐं,
कै धीर धरनों परैगौ आखिर, तौ बोलौ कितनों,चिंघारै कोई?
तुम अपने ग़म कूँ,जमाने भर में,अनहोंतौ जैसौ समझ रये हौ,
सबई कौ खेला है एक जैसौ,तौ बोलौ कितनों पुकारै कोई,
है कल्ल ही की सी बात हमनें कही कें इतनों न रोऔ भइया,
समझनों ही जब न कोई चाहै ,तौ कैसें, कितनों सुधारै कोई,
उर्मिला माधव,
2.6.2017

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कील ते

ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी, कितनी गहराई पूछें साहिल ते, हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की, दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते, उर्मिला माधव 28.3.2018

अपनों आप बनानौं होगौ

ब्रज की दुनियां अपनों आप बनानों होगौ, बा के बाद जमानों होगौ.. मार पीट ते, चों डरपौगे, आगें हाथ बढ़ानों होगौ। चलनों हो जो संग सबई के झूठौ लाड़ लड़ानों होगौ। इक ढर्रा पै नांय चलैगी, नक्सा नयौ बनानों होगौ.. नाम उजागर करवे काजें, गहरौ रंग लगानों होगौ। खूब बना लै महल अटरिया, सांस रुकी तौ जानों होगौ। जग में जितने स्वांग रचे हैं, सबकौ मोल चुकानों होगौ।। उर्मिला माधव

प्रीत की रीत निभावै

थोरे दिन कौ जीवन है तौ मन कूँ मत भरमावै, रह जागी यईं धरम संकला,सांस जबई रुक जावै, माई बाप और पुत्र पौत्र कूँ,कितनौउ लाड़ लड़ावै आँख मुंदी सोई भये बटाऊ,फिर कोउ लौट न पावै नित-नित रार करै दुनियां में,ज़र,जोरू की खातिर, बढ़िया हो जो हर काऊ ते,प्रीत की रीत निभावै, उर्मिला माधव.. 24.10.2016