सुरू तौ करौ,सबकूँ सुननी परैगी,
कै इक दिन जिही गैल चुननी परैगी,
कै इक दिन जिही गैल चुननी परैगी,
अबई होस में नानै जे दुनियां बारे,
खियालन की दुनियां ऊ बुननी,परैगी,
खियालन की दुनियां ऊ बुननी,परैगी,
सकारें की संजा तौ हौनी है निस्चित,
तौ फिर खोपड़ी अपनी धुननी परैगी,
तौ फिर खोपड़ी अपनी धुननी परैगी,
अबई का भई ऐ,अबई और होगी,
तौ मनुआ में सिग बात घुननी परैगी,
तौ मनुआ में सिग बात घुननी परैगी,
महलिया अटारी,.....डरे यंईं रहेंगे,
जे झूठी ऐ दुनियां,बिसुननी परैगी,
उर्मिला माधव..
7.1.2017
जे झूठी ऐ दुनियां,बिसुननी परैगी,
उर्मिला माधव..
7.1.2017
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