मइया मोकूँ रोज-रोज समझावत है,
लौट फेर केँ बाई की सुधि आवत है,
लौट फेर केँ बाई की सुधि आवत है,
सबते छुपकें चढ़ केँ गई अटरिया पै,
सइ संजा ते मन मेरौ घबरावत है,
सइ संजा ते मन मेरौ घबरावत है,
सब दुनियां के पीयु घरई में हैं आली,
मेरौ मन बिरहा कौ राग अलापत है,
मेरौ मन बिरहा कौ राग अलापत है,
कल्ल पड़ोसी बाबा मोते पूछ उठे,
बे मतलब चौं आंसू रोज बहावत है,
बे मतलब चौं आंसू रोज बहावत है,
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