बे मतलब की इन बातन में नांय कछू
ख़ूब है दुनियां पर ,हाथन में नांय कछू
ख़ूब है दुनियां पर ,हाथन में नांय कछू
तरह-तरह के फूल लगा लए, बगिया में,
एक तुलसी बिन घर आँगन में नांय कछू
एक तुलसी बिन घर आँगन में नांय कछू
बिन्दाबन की धरती कितनी पावन है,
पर कान्हां बिन अब कानन में नांय कछू,
पर कान्हां बिन अब कानन में नांय कछू,
गोकुल बारे दूध-दही को,खेल खतम,
माय जसोदा, अब माखन में नांय कछू,
माय जसोदा, अब माखन में नांय कछू,
चित्त उचटगौ बे मतलब की दुनियां ते,
चाहत बाक़ी अब जा मन में नांय कछू...
उर्मिला माधव,
19.12.2016
चाहत बाक़ी अब जा मन में नांय कछू...
उर्मिला माधव,
19.12.2016
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