जिंदगी कट रही है मुस्किल ते,
भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते,
सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है,
हम न जीतेंगे काऊ आदिल ते,
कितनी तक़लीफ़ है करेजा में,
पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते,
नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी,
कितनी गहराई पूछें साहिल ते,
हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की,
दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते,
उर्मिला माधव
28.3.2018
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