मैं तुमें समसान तक लै जाउंगी,
सच तुमें आँखिन ते मैं दिखवाउंगी,
ऐसी सच्चाई लिखी है राख पै,
खुद ई पढियोँ मैं कहा पढ़वाउंगी,
श्याम मुख हों या कि हों कर्पूर मुख,
जे ई सबकौ अंत है समझाउंगी,
देह मुर्दा,आग में जर जायगी
कष्ट काया कौ कहाँ कह पाउंगी,
यईं धरे रह जांगे, घर और जमीन,
है का मेरौ ता पै मैं इतराउंगी,
उर्मिला माधव,
15.4.2016f
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