अकेले आए दुनियां में, हमारौ संग को देतौ,
हमारी भींजी चूँनर कूं, हवा कौ रंग को देतौ,
हमारी आत्मा में राग अब तक डूबते डोलें,
तौ टूटी रागिनी कूं यों बताऔ चंग को देतौ,
विधाता नें बनायौ है,हमें बस रंज सहिबे कूं,
करेजा के तड़पबे कूं, बताऔ जंग को देतौ
कै जिननै ज़िन्दगी भर मांसन के खून चूसे हों,
तौ ऐसे राक्षसन कूं तब छमा कौ ढंग को देतौ
मगर हां जाई दुनियां में न होते भोरे ब्रज वासी
तौ फिर किसना की नगरी कूं भला हुड़दंग को देतौ,
उर्मिला माधव
25.12.2017
Comments
Post a Comment