थोरे दिन कौ जीवन है तौ मन कूँ चों भरमावै,
रह जागी यईं धरम संकला,सांस जबई रुक जावै,
माई बाप और पुत्र पौत्र कूँ,कितनौउ लाड़ लड़ावै
आँख मुंदी सोई भये बटाऊ,फिर कोउ लौट न पावै
नित-नित रार करै दुनियां में,ज़र,जोरू की खातिर,
बढ़िया हो जो हर काऊ ते,प्रीत की रीत निभावै,
उर्मिला माधव
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