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सांस जबई रुक जावै

थोरे दिन कौ जीवन है तौ मन कूँ चों भरमावै,
रह जागी यईं धरम संकला,सांस जबई रुक जावै,

माई बाप और पुत्र पौत्र कूँ,कितनौउ लाड़ लड़ावै
आँख मुंदी सोई भये बटाऊ,फिर कोउ लौट न पावै

नित-नित रार करै दुनियां में,ज़र,जोरू की खातिर,
बढ़िया हो जो हर काऊ ते,प्रीत की रीत निभावै,
उर्मिला माधव

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ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी, कितनी गहराई पूछें साहिल ते, हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की, दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते, उर्मिला माधव 28.3.2018

बबा जू

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कैसें आंकौ जायगौ

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