पीहर कौ सावन ... सावन में सुध आई बहुत जब पीहर की, व्यथा कहीं ना जाय तनक मन भीतर की, ठाड़ी चूडिन के ठेलन पे बैय्यर दीख रहीं, पहरि हाथ में चूड़ी खालिस पीतर की, कमर कौंधनी ऑ पाँइन मे पायल ...
जब तक है जी कूँ आस न घबराएं और चलें, कितने भी इकल्ले हों कोऊ नाएँ और चलें, जीवन कौ का है आज हतै और कल नहीं, जो राजी ऐं जा बात पे, तौ आएं और चलें, भई ज़िन्दगी तौ गैल है मिलने हैं ,नए लोग, त...
ब्रज ग़ज़ल सब राम ने बनाए अनुपात में,बराबर, औक़ात में बराबर,और जात में बराबर, हर लंग है अँधेरौ,बिल्कुल ही एक जैसौ, और रौशनी कौ जलवा परभात में बराबर जो बैर कर रए हैं,अपनों चलन है बिन...