Skip to main content

Posts

Showing posts from July, 2019

वाह करें

ब्रिज ग़ज़ल भीतर-भीतर डाह करें, ऊपर ते बस वाह करें, ठगिया,झूठे, अभिमानी, राम-राम अल्लाह करें, स्याऊ-स्याऊ म्हों देखे की, पीठ मुड़ी सोइ आह करें, म्हों ते कहि रए जीते रऔ बरबादी  की चा...

भयौ है

कौनसी बातन पै इतरायौ भयौ ऐ, बाबरौ इनसान भरमायौ भयौ ऐ, हांऊं-फाऊं कर रह्यौ ऐ चार लंग कूँ, झूठ की दुनियां पै बौरायौ भयौ ऐ होस में आजा,मरै मत लोभ ते रे, जोरिवे कौ भूत चों छायौ भयौ है, ...

सावन

पीहर कौ सावन ... सावन में सुध आई बहुत जब पीहर की, व्यथा कहीं ना जाय तनक मन भीतर की, ठाड़ी चूडिन के ठेलन पे बैय्यर दीख रहीं, पहरि हाथ में चूड़ी खालिस पीतर की, कमर कौंधनी ऑ पाँइन मे पायल ...

और चलें

जब तक है जी कूँ आस न घबराएं और चलें, कितने भी इकल्ले हों कोऊ नाएँ और चलें, जीवन कौ का है आज हतै और कल नहीं, जो राजी ऐं जा बात पे, तौ आएं और चलें, भई ज़िन्दगी तौ गैल है मिलने हैं ,नए लोग, त...

बादशाहत

इस अहद की बादशाहत और जहन्नुम ज़िन्दगी, बीच की कोई राह हो तो हमको भी बतलाइए , उर्मिला माधव

अनुपात में बराबर

ब्रज ग़ज़ल सब राम ने बनाए अनुपात में,बराबर, औक़ात में बराबर,और जात में बराबर, हर लंग है अँधेरौ,बिल्कुल ही एक जैसौ, और रौशनी कौ जलवा परभात में बराबर जो बैर कर रए हैं,अपनों चलन है बिन...