जब तक है जी कूँ आस न घबराएं और चलें,
कितने भी इकल्ले हों कोऊ नाएँ और चलें,
जीवन कौ का है आज हतै और कल नहीं,
जो राजी ऐं जा बात पे, तौ आएं और चलें,
भई ज़िन्दगी तौ गैल है मिलने हैं ,नए लोग,
तौ बोलें इन्क़लाब सब मिल जाएं और चलें,
कर दीन्हों है कुम्हार नें,पूरौ ई अबा, ख़राब,
कोऊ बात नाएँ जी कूँ यों समझाएं और चलें,
जीवन मिलौ है मांस कौ,उपकार की है बात,
सक्षम भयौ अपुनपौ तौ इतराएं और चलें..
उर्मिला माधव,
15.7.2017
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