ब्रिज ग़ज़ल
भीतर-भीतर डाह करें,
ऊपर ते बस वाह करें,
ठगिया,झूठे, अभिमानी,
राम-राम अल्लाह करें,
स्याऊ-स्याऊ म्हों देखे की,
पीठ मुड़ी सोइ आह करें,
म्हों ते कहि रए जीते रऔ
बरबादी की चाह करें,
अपनों उल्लू सूधौ हो बस,
काउ की चों परवाह करें,
छोड़ अथाईं बेमतलब की,
निज गलियन की राह करें,
उर्मिला माधव,
1.8.2018
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