छूट जानौ है ये जमानौ सब,
बात सांची है बात मानौ सब,
जाकौ जितनों गुमान भारी है,
बोझ ऊ वा ही कूँ उठानौ सब,
जे जो मिथ्या है, सिर्फ़ दुनियां है,
शाश्वत ही है आनौ-जानौ सब,
एक दिन सब सफर पे चल दिंगे
व्यर्थ ही समझौ घर बनानौ सब,
सब कूँ तन्हा सफ़र पै जानौ है,
का है फिर रुठनों मनानौ सब,
सब की गाड़ी ठड़ी ऐ पटरिन पै,
फिर न चलनों ऐ ई बहानौ सब,
उर्मिला माधव,
2.8.2019
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