तरह....
तमाम रात सितारों से बात करते रहे
तमाम रात सितारेन ते बात कत्त रहे,
डरप-डरप कें,करेजा पे हाथ धत्त रहे,
छोड़िबे वारौ हमें छोड़ि कें चलौऊ गयौ,
हमईं गमार रहे,याद करिकें मत्त रहे,
कहिंगे कौन ते ,गल्ती तौ बस हमारी ऐ,
जो हमते है गयौ दिन रात बा ऐ भत्त्त रहे,
हमारे कष्ट की गिनती तौ नाई बैसे हूँ ,
इतेक पै हू तौ हम बिनके पांय पत् रहे,
जरूरी का ई के कोऊ पुछि लेतौ आयकें हमें
ऑ हम डरे-डरे ही बिछौना पै बस पजत्त रहे,
#उर्मिलामाधव...
१७.९,२०१५
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