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जावत हैं

तरह---
दिन मुसीबत के हर इक हाल में कट जाते हैं...
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दिन मुसीबत के हरेक हाल में कट जावत हैं,
जि और बात है कद मांस के घट जावत हैं ,

बुरे बखत में अगर धैर्य संग संग रहै,
पहाड़ गम के यों ई खेल में हट जावत हैं,

अबई इतेक ना बिगरी ना गंगा पांज भई,
निरे डरे हैं,अपईं जान ते डट जावत हैं ,

चलत रहेंगे,न सुस्तांगे जो बीच  गैल कभू
बिनईं के ताईं भले दिन भी पलट आवत हैं,

भलेंऊं काटि दई नार,पर ना मूड़ झुकौ,
हैं ऐसे बीर अभऊ तख़्त पलट जावत हैं...
#उर्मिलामाधव..
21.9.2015

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मुस्कील ते

ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी, कितनी गहराई पूछें साहिल ते, हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की, दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते, उर्मिला माधव 28.3.2018

अपनों आप बनानौं होगौ

ब्रज की दुनियां अपनों आप बनानों होगौ, बा के बाद जमानों होगौ.. मार पीट ते, चों डरपौगे, आगें हाथ बढ़ानों होगौ। चलनों हो जो संग सबई के झूठौ लाड़ लड़ानों होगौ। इक ढर्रा पै नांय चलैगी, नक्सा नयौ बनानों होगौ.. नाम उजागर करवे काजें, गहरौ रंग लगानों होगौ। खूब बना लै महल अटरिया, सांस रुकी तौ जानों होगौ। जग में जितने स्वांग रचे हैं, सबकौ मोल चुकानों होगौ।। उर्मिला माधव

प्रीत की रीत निभावै

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