तरह---
दिन मुसीबत के हर इक हाल में कट जाते हैं...
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दिन मुसीबत के हरेक हाल में कट जावत हैं,
जि और बात है कद मांस के घट जावत हैं ,
बुरे बखत में अगर धैर्य संग संग रहै,
पहाड़ गम के यों ई खेल में हट जावत हैं,
अबई इतेक ना बिगरी ना गंगा पांज भई,
निरे डरे हैं,अपईं जान ते डट जावत हैं ,
चलत रहेंगे,न सुस्तांगे जो बीच गैल कभू
बिनईं के ताईं भले दिन भी पलट आवत हैं,
भलेंऊं काटि दई नार,पर ना मूड़ झुकौ,
हैं ऐसे बीर अभऊ तख़्त पलट जावत हैं...
#उर्मिलामाधव..
21.9.2015
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