कैसी अब उम्मीद काऊ ते,कोई चों धीर बंधावै
भयौ करेजा पथ्थर कौ, को अँखियन नीर बहावै,
अपनौ रस्ता पांय हमारे,आपई चलनौ,पड़ै हमेस,
चों फिर अपने मन के छाले गैरन कूँ दिखलावै,
राम कसम जे दुनियां मो कूँ, रोज़ रोज डरपावै,
कैसी अब उम्मीद काऊ ते,कोई चों धीर बंधावै
भयौ करेजा पथ्थर कौ, को अँखियन नीर बहावै,
अपनौ रस्ता पांय हमारे,आपई चलनौ,पड़ै हमेस,
चों फिर अपने मन के छाले गैरन कूँ दिखलावै,
राम कसम जे दुनियां मो कूँ, रोज़ रोज डरपावै,
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