Skip to main content

रुपइये नईं ऐं

रातों रात नोट बंदी और अपने पास मात्र 50 रुपए, और तिहाड़ जेल का मुशायरा, जो महसूस हुआ--/

कोई अपना, भैये नईं ऐं,
अपने पास रुपइये नईं ऐं,

कैसी दुनियादारी भइया,
जो गाड़ी में पहिये नईं ऎं,

धोका धड़ी से बढ़िया ये है,
प्यार नहीं,तौ कहिये,नईं ऎं,

अपनी भी तौ अना है आख़िर,
हम को कुछ भी, चइये नईं ऎं,
उर्मिला माधव..
19.11.2016

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कील ते

ब्रिज ग़ज़ल जिंदगी कट रही है मुस्किल ते, भागि जामेंगे, तेरी महफिल ते, सांस लैनौ भी एक जुआ सौ है, कैसें जीतेंगे काऊ आदिल ते, कितनी तक़लीफ़ है करेजा में, पूछ कें देखियों तौ बिस्मिल ते, नाव काग़ज़ की देह आफ़त सी, कितनी गहराई पूछें साहिल ते, हम कूं दूरी बताऔ मंजिल की, दूनी हिम्मत करिंगे हम दिल ते, उर्मिला माधव 28.3.2018

बबा जू

हकीकत बबा जू,समझनी परैगी, मजा की सजा तौ,भुगतनी परैगी, न बैय्यर की इज्जत है मिसरी कौ ढेला, जि गोली कुनैनी,गटकनी परैगी, घड़ी तुमनें बांधी है,सोने की मन भर, तौ लोहेउ की तुमकूँ पहरनी ...

कैसें आंकौ जायगौ

प्रेम कौ अनुपात आखिर कैसैं आंकौ जायगौ, यों बताऔ, मन के भीतर कैसैं झाँकौ जायगौ, पीर कौ अनुमान अब तक कौन कर पायौ कहौ, एक ही लठिया ते कैसे प्रेम हाँकौ जायगौ, आँख के आँसुंन ऐ तौ तुम हाथ ते ढकि लेओगे, घाव की दुनियां कौ हिस्सा कैसैं ढाँकौ जायगौ, जिंदगी भर राख चूल्हे की लगी रई हाथ में जे बताऔ और कब तक रेत फांकौ जायगौ, झालरी,झूमर सजा केँ, देह सुन्दर कर लई, कौन खन जे भाग मोतिन संग टांकौ जायगौ ? उर्मिला माधव.... 4.4.2016