रातों रात नोट बंदी और अपने पास मात्र 50 रुपए, और तिहाड़ जेल का मुशायरा, जो महसूस हुआ--/
कोई अपना, भैये नईं ऐं,
अपने पास रुपइये नईं ऐं,
कैसी दुनियादारी भइया,
जो गाड़ी में पहिये नईं ऎं,
धोका धड़ी से बढ़िया ये है,
प्यार नहीं,तौ कहिये,नईं ऎं,
अपनी भी तौ अना है आख़िर,
हम को कुछ भी, चइये नईं ऎं,
उर्मिला माधव..
19.11.2016
Comments
Post a Comment