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पक्षधर बुलाने होंय

ब्रज की दुनियां
Manglesh Dutt Chaturvedi 

तुमें जो अपने कछू पक्षधर बुलाने होंय,
महा पै जाऔ जहां मोतबर ठिकाने होंय।

बिगर बजाएं कोऊ रंग तौ जमैगौ नहीं,
हमें बतइयों अगर साजगर बुलाने होंय।

बुलइयों हमकूँ तुमें आकें हम बतामेंगे,
हवा बिगर भी अगर, पालघर चलाने होंय।

हमीर राग पै, पटदीप ना जुरैगो कबउ,
बजइयों ढोल जबई ताल पर बजाने होंय।

अकेले घर में कहा दीप तुम जराऔगे,
जरइयों दीप जबई चार घर सजाने होंय।
उर्मिला माधव

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